DNA Full Form क्या है ? DNA कैसे प्रभावित होती है अनुवांशिकता ? पूरी जानकारी हेतु सम्पूर्ण आर्टिकल पढ़ें:- 

DNA का फुल फॉर्म होता है – डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड (Deoxyribonucleic Acid )| डीएनए भौतिक इकाई अणुओं का एक संग्रह होता है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी पूर्वजो के वंशानुगत गुणों के आधार पर अगले पीढ़ी में स्थानांतरित होता रहता है | सभी जीवों की संरचना का मूलभूत आधार डीएनए पर आधारित होता है | इसे अनुवांशिकता की प्राथमिक इकाई भी कहा जाता है | आज के इस आर्टिकल में हम डीएनए की खोज, संरचना एवं कार्य के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे |

DNA Full Form क्या है ? (What is DNA?)

पिछले परिच्छेद में ही हम डीएनए से रूबरू हो चुके हैं | डीएनए जीवन की भौतिक इकाइयों का एक संग्रह होता है, जो वंशानुगत गुणों को पूर्वजो से अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का पूरक होता है | सभी जीवों का डीएनए कोड अद्वितीय होता है | नवजात शिशु का डीएनए आधा उसके पिता और आधा उसके माता से निर्धारित होता है | एक तरीके से यह विरासत के तरह अगली पीढ़ी में स्थानांतरित होता रहता है |

कब और कैसे हुई डीएनए की खोज ? 

डीएनए की खोज का प्रथम श्रेय स्विस जीव वैज्ञानिक, जोहान फ्रेडरिक मिशर को दिया जाता है, जिन्होंने इसका पता 1869 में लगाया था | परन्तु डीएनए की खोज के पीछे दो और चेहरे थे, जिन्होंने प्रयोगाताम्क आंकड़ो के आधार पर डीएनए की खोज कर उनके ढाँचे का अवलोकन किया था | जिसके पश्चात उन्हें अनुवांशिकी विज्ञान जगत को एक नयी दिशा देने हेतु 1962 में सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिकी पुरस्कार “ नोबेल पुरस्कार ” से सम्मानित किया गया |

डीएनए के विभिन्न प्रकार (Types Of DNA )

डीएनए के तीन प्रकार है:

  • A- DNA: B-DNA के भाँती ही A-DNA दायीं तरफ कुंडलित होता है | कठिन परिस्थितियों में यह डीएनए की रक्षा करता है |
  • B-DNA: साधारण रूप से पाया जाने वाला डीएनए B-DNA होता है | यह डीएनए दायीं तरफ कुंडलित होता है | शारीरिक परिस्तिथियों के अनुसार इसका निर्माण होता है |
  • Z-DNA: डीएनए का यह प्रकार बायीं तरफ होता है | यह डीएनए जीन के उत्पति के निर्धारण में भी सहायक होता है.

Genomic DNA

ये डीएनए का सबसे प्रसिद्ध प्रकार है।  ये एक जीव के सेल में मौजुद जेनेटिक जानकारी का पूरा सेट होता है। जीनोमिक डीएनए में वो सारे जीने होते हैं जो जीव का विकास, वृद्धि और क्रियाशिलता के लिए अवश्यक होते हैं।

Mitochondrial DNA (Mt DNA): 

माइटोकॉन्ड्रिया ऊर्जा उत्पादन के लिए जिम्मेदार कोषिकाई संरचनाएं हैं।  माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए माइटोकॉन्ड्रिया के अंदर पाया जाता है और इसका वारिस प्राप्त होता है मां से।  इसमे ऊर्जा उत्पादन और कोषिकी संश्लेशन से संबंधित जेने होते हैं

Chloroplast DNA

अनुमोदित के उद्योग में, क्लोरो फोटोसिंथ दवा के लिए जिम्मेदार होते हैं।  क्लोरोप्लास्ट डीएनए की तरह इसमें क्लोरो के अंदर स्थित होता है और क्रोमोस्टैटिक डीएनए में फोटोसिंथ सर्जरी और अन्य उपकरणों से संबंधित जीन होते हैं।

Plasmid DNA

प्लास्मिड डीएनए के टुकड़े और अन्य पदार्थ पाए जाने वाले छोटे, इलेक्ट्रॉन डीएनए के टुकड़े होते हैं।  प्लास्मिड बार-बार अतिरिक्त जीन्स को साथ लेकर जाते हैं जो मेज़बान को फ़ायदा पहुँचा सकते हैं, जैसे कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध या कुछ विशिष्ट मादक पदार्थों को तोड़ने की क्षमता।

Extrachromosomal DNA

इसका मतलब है कि डीएनए जो सेल के न्यूक्लियस के मुख्य क्रोमोसोमल डीएनए के बाहर मौजूद होता है। प्लाज्मिड डीएनए इसके एक उदाहरण है जो बाह्यक्रोमोसोमल डीएनए की एक प्रकार है। कुछ वायरसों के पास भी ऐसा बाह्यक्रोमोसोमल डीएनए होता है जिसे वे मेजोम के जीनोम में सम्मिलित करते हैं।

Satellite DNA: 

इस प्रकार का डीएनए छोटे दोहरे श्रेणियों से मिलकर बनता है जो प्रोटीन्स को एनकोड नहीं करते हैं। यह अक्सर क्रोमोसोमों के सेंट्रोमियर के पास आसपास के क्षेत्रों में पाया जाता है और सेल विभाजन के दौरान संरचनात्मक कार्यों में शामिल होता है।

Telomeric DNA:

टेलोमेरिक डीएनए: टेलोमेरेस लीनियर क्रोमोसोमन के अंत में विशेष क्षेत्र होते हैं।  ये दोहराते हैं डीएनए श्रेणियां हैं जो क्रोमोसोमों के अंत को खराब होने से बचाते हैं और प्रगति के दौरन जेनेटिक जानकारी का नुक्सान रोकने में मदद करते हैं।

Coding DNA aur Non-Coding DNA: 

कोडिंग डीएनए और नॉन-कोडिंग डीएनए: जीनोमिक डीएनए के अंदर कोडिंग क्षेत्र (जेन) होते हैं जो प्रोटीन बनाने के लिए आदेश प्रदान करते हैं।  नॉन-कोडिंग डीएनए, दूसरी तरफ, सीधे रूप से प्रोटीन को एन्कोड नहीं करते, लेकिन नियम और समग्र भूमिकाएं हो सकती हैं

Introns and Exons:

इंट्रॉन और एक्सॉन: जीन को अक्सर एक्सॉन और इंट्रॉन नामक वर्गों में विभाजित किया जाता है।  एक्सॉन में कोडिंग अनुक्रम होते हैं जिन्हें प्रोटीन में अनुवादित किया जाता है, जबकि इंट्रॉन गैर-कोडिंग अनुक्रम होते हैं जिन्हें स्प्लिसिंग नामक प्रक्रिया के दौरान हटा दिया जाता है।

ये विभिन्न प्रकार के डीएनए कोशिकाओं और जीवों के भीतर विभिन्न कार्य करके जीवन की जटिलता और विविधता में योगदान करते हैं।

डीएनए की संरचना- (Structures of DNA):

डीएनए की सारी जानकारी को एडेनीन, ग्वानिन, थईमीन और साईटोसिन के चार रासायनिक आधारों में संग्रह करते हैं . मानव शरीर में लगभग 3 बिलियन बेस होते हैं तथा 99% प्रतिशत से ज्यादा आधार सभी लोगों के एक समान होते हैं.ये सारे घटक घुमावदार सीढ़ी जैसे दिखने वाले डीएनए से जुड़े हुए होते हैं.

डीएनए की संरचना- (Structures of DNA):

डीएनए की सारी जानकारी को एडेनीन, ग्वानिन, थईमीन और साईटोसिन के चार रासायनिक आधारों में संग्रह करते हैं | मानव शरीर में लगभग 3 बिलियन बेस होते हैं तथा 99% प्रतिशत से ज्यादा आधार सभी लोगों के एक समान होते हैं | ये सारे घटक घुमावदार सीढ़ी जैसे दिखने वाले 

डीएनए से जुड़े हुए होते हैं |

डीएनए के महत्वपूर्ण कार्य :

डीएनए के प्रमुख कार्य निम्नलिखित है :-

  •  जीवो में पाए जाने वाले अनुवांशिक पदार्थ डीएनए होते हैं, जिससे वंशानुगत तरीके से स्थानांतरण होता है |
  •  कोशिकाओं के निर्माण की आवश्यक जानकारी डीएनए में संग्रहित होती है |
  •  कोशिका विभाजन के दौरान हुई गलती, अनुवांशिक समस्याओं का प्रमुख कारण बनती हैं |
  •  डीएनए फिंगरप्रिंटिंग विधि द्वारा हूबहू एक समान दिखने वाले डीएनए का निर्माण किया जा सकता है |
  •  प्रतिकृती प्रक्रिया : एक कोशिका से अन्य छोटी कोशिकाओं में अनुवांशिक जानकारी का स्थानान्तरण करना और कोशिका विभाजन के समय डीएनए का एक समान बँटवारा ही प्रतिकृती प्रक्रिया है |

उत्परिवर्तन : डीएनए अथवा उसकी संरचनाओं तथा सीढ़ीनुमा घुमावदार श्रृंखला में बदलाव ही उत्परिवर्तन कहलाता है| 

प्रतिलेखन:

  • कोशिकीय चयापचय
  • डीएनए फिंगर प्रिंट्स 
  • प्रतिलिपिकरण
  • कोशिकाओं का समान वितरण 
  • जीन उपचार

डीएनए साधारणतः क्रोमोजोम के रूप में पाया जाता है | एक कोशिका में गुणसूत्रों का समूह जीनोम का निर्माणक होता है | मानव के जीनोम लगभग 23 जोड़े अर्थात 46 गुणसूत्रों से मिलकर बने होते हैं | 46 गुणसूत्रों में डीएनए के लगभग 3 अरब जोड़े होते हैं |

डीएनए के बारे में कुछ रोचक तथ्य:

  1.  डीएनए कभी नष्ट नहीं हो सकता, यह पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित होते रहते हैं |
  2.  सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों से उत्परिवर्तन संभव है | डीएनए में परिवर्तन आने से ही आनुवांशिक बदलाव संभावित है |
  3.  आपको जानकार हैरानी होगी की 1 ग्राम डीएनए में 700 टेराबाईट की जानकारी संग्रहित की जा सकती है |
  4.  डीएनए प्रत्येक कोशिका में 0.009 माइक्रोमीटर की जगह लेता है |

निष्कर्ष:

 डीएनए प्रकृति की अनमोल रचना है, जो जीवों के उत्पत्ति और उनके अस्तित्व का पूरक है |

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FAQS DNA 

प्रश्न – DNA के खोज करता कौन है ?

उत्तर – बहुत से लोग मानते हैं कि अमेरिकी जीवविज्ञानी जेम्स वाटसन और अंग्रेजी भौतिक विज्ञानी फ्रांसिस क्रिक ने 1950 के दशक में डीएनए की खोज की थी। हकीकत में ऐसा नहीं है। बल्कि, डीएनए की पहचान पहली बार 1860 के दशक के अंत में स्विस रसायनज्ञ फ्रेडरिक मिशर द्वारा की गई थी।

प्रश्न – डीएनए का हिंदी में क्या कहा जाता है?

उत्तर – DNA full form  – Deoxyribonucleic Acid कहा जाता है जिसे हिंदी में डी-ऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल कहते है। 

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