Namaz ka tarika ,Namaz कैसे पढ़े ,नमाज़ में कौनसी आयतें पढ़े ,नमाज़ में कितनी रकात होती है। नमाज़ में क्या वाज़िब है और क्या फ़र्ज़ है जाने हमारे इस तहरीर (लेख) में।

सबसे पहले हमारी तरफ से आपको अस्सलामु अलैकुम – मेरा नाम सरफराज है ओर में आपके लिए इस लेख में नमाज़ का तरीका बताने वाला हूँ जिससे आपको सही तरीका पता चले और आप दुरुस्त नमाज़ अदा कर सको।

Namaz ka tarika ( नमाज़ का तरीका ) 

नमाज़ अल्लाह से बात चीत करने का एक ज़रिया है।इस्लाम 5 स्तंभ पे टिका है जिसमे से एक नमाज़ है। अल्लाह ने नमाज़ हर उस शख्स पर फ़र्ज़ की है जो अल्लाह पर उसके रसूल (SAW) पर यकीन रखता हो यानी मोमिन औरत ओर मर्द ओर नमाज़ वाज़िब है।

Namaz ki Ahmiyat ( नमाज़ की अहमियत )

नमाज़ की क्या अहमियत है ये हम जानेंगे अगर आप इस बात को अच्छे से जान लेते है तो शायद कभी नमाज़ छोड़ना पसंद नही करेंगे। नमाज़ हर हाल में वाज़िब है।यहाँ तक अल्लाह ने नमाज़ को जंग में भी वाज़िब किया अगर आप जंग में है तो सलातुल कौफ़ नमाज़ पड़ सकते है।

आज हम जिस धड़ल्ले से नमाज़ों को छोड़ रहे है ज़रा ज़रा से बात पर हम नमाज़ों को बिल्कुल तवज्जों नही देते है। अगर हम सफर में है तो हमारी नमाज़े छूट जाती है या हम शादी में है तो हमारी नमाज़े छूट जाती है या हम खेल के मैदान में है तो हमारी नमाज़े छूट जाती है। 

हुजूर (SAW) ने इरशाद फ़रमाया की नमाज़ (Namaz) मेरी आँखों की ठंडक है।

Namaz kya hai ( नमाज़ क्या है )

नमाज़ शब्द एक parsian word (Persian: نماز) है। और arabic शब्द salah है जिसे (Arabic: صَلاة ) कहते है। हर वह शख्स जिसने कलमा पढ़ा है उसपर नमाज़ वाज़िब है नमाज़ 7 साल की उम्र से वाज़िब हो जाती है। ओर Quaran में साफ तौर पर लिखा गया है जो शख्स नमाज़ नही पड़ता वह अल्लाह की नजर में सबसे नीचे है।जो लोग नमाज़ पड़ते है और छोड़ते है उनपे भी लालत भेजी गई है।हर मोमिन ओर मर्द को 5 वक़्त की नमाज़ पढ़नी चाहिए जोकि फ़र्ज़ है। कुछ लोग तो इसलिए नमाज़ छोड़ देते है कि जनको नमाज़ का तरीका ही नही पता तो उनके लिए हम namaz ka tarika बता रहेनमाज़ के लिए किसी भी शख्स से जानना आलिम से जानना कोई शर्म की बात नही बल्कि नमाज़ छोड़ना शर्म की बात है।

नमाज़ के लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होती है पहेले।

  • ग़ुस्ल का होना
  • वजू का होना
  • कपड़ो का पाक होना
  • जगह का पाक होना

Gusl ka tarika ( ग़ुस्ल का तरीका )

अगर आप नापाक है तो आपका ग़ुस्ल होना बेहद जरूरी है।पेशाब का छूट जाना नापाक करता है या कपड़ो में नजासत का लगना भी नापाकी है। हमबिस्तरी के बाद भी ग़ुस्ल जरूरी है। ग़ुस्ल का तरीका जाने

  1. दोनों हाथ कलाहियो तक धो लीजिये ।
  2. शर्मगाह पर पानी डाल कर धो लीजिये ।
  3. ठीक उसी तरह सारी चीज़ें कीजिये जैसे वजू में करते हैं
  4. कुल्ली कीजिये ।
  5. नाक में पानी डालिए ।
  6. कान को भी धोए।
  7. और पुरे बदन पर आगे और पीछे जानिब पानी डालिए
  8. सर धो लीजिये ।
  9. हाथ पांव धो लीजिये।

Ghusl ki Dua ( ग़ुस्ल की दुआ )

ये ग़ुस्ल का तरीका है याद रहे आप ग़ुस्ल में ज्यादा से ज्यादा पानी मत बहाये बस अपने बदन के हर हिस्से को वज़ू की तरह 3 बार धोए । इस्लाम मे जायद पानी बहाना गैर मुनासिब तरीका है।

ग़ुस्ल की तीन फ़र्ज़ है ।

  1. कुल्ली इस तरह करना कि होठ से लेकर हलक तक ओर दांतो की सारी जड़ो में पानी पहुच जाए।
  2. नाक में पानी इस तरह डालना की नरम हड्डी तक पानी पहुच सके।
  3. सिर से पैर तक इस तरह पानी बहाना की एक बाल बराबर भी कही सूखा ना रहे ,इन तीनो से कुछ भी छूट तो हरगिज ग़ुस्ल नही होगा।

क्या ग़ुस्ल के बाद वज़ू की जरूरत है ?

अगर आप ग़ुस्ल करते वक़्त वज़ू कर चुके है या ग़ुस्ल करने के बाद आप कोई ऐसा काम नही किया जिससे वज़ू का टूटना मुनासिब हो तो आपको ग़ुस्ल के बाद वज़ू की जरूरत नही लेकिन बेहतर होगा ग़ुस्ल के साथ वज़ू किया जाए।

ग़ुस्ल खाने में पैशाब करना कैसे है

अगर आप ग़ुस्ल खाने में पैशाब करते है जोकि अक्सर लोग ऐसा करते है तो शर्त ये है कि आपका ग़ुस्लखाना कच्चा मीठी का नही होना चाहिए जहाँ पैशाब जमा हो जाये या सुख जाए ऐसा करना मकरू है (हराम के करीब)। ऐसा करने से आपको भूलने की बीमारी हो सकती है .

Wazu ka Tarika (वज़ू का तरीका)

नमाज़ अदा करने के लिए वज़ू शर्त है -वज़ू के बिना आप नमाज़ अदा नही कर सकते बिना वज़ू नमाज़ पढ़ना जाएज़ नही। वज़ू का तरीका ये है कि आप नमाज़ के लोए वज़ू का इरादा कर ओर वज़ू शुरू करने से पहेले बिस्मिल्लाह कहे ।

  • दोनों कलाहियों तक हाथ धोंये
  • कुल्ली करे 
  • नाक में पानी चढ़ाये 
  • चेहरा धोंये
  • दाढ़ी में खिलाल करें
  • दोनों हाथ कुहनियों तक धोंये
  • एक बार सर का और कानों का मसाह करें
  • (मसह का तरीका -आप अपने हाथों को गिला कर के एक बार सर और दोनों कानों पर फेर लें। कानों को अंदर बाहर से अच्छी तरह साफ़ करे।)
  • दोनों पांव टखनों तक धोंये

ये वज़ू का तरीका है तीन तीन बार आपको पानी लेकर हाथ,नाक,कान,मुह ओर पाँव धोने होते है लेकिन मसहा एक बार धोना होता है। जायद पानी बहाना अल्लाह के रसूल(ﷺ) ने मना फरमाया है ।

वज़ू की दुआ ( wazu ki dua )

वज़ू करने के बाद आपको ये दुआ पढ़नी है ।

wazu ki dua

ALLAHUmmaj’alni minat tawwabeen waj’alnee mina-al mutahhareena

नमाज़ की रक’आत और समय (Namaz ka tarika )

सभी मुसमानों के लिए 5 वक़्त की नमाज़ फ़र्ज़ की गई है जो कुछ इस तरह से है हम आपको इसका एक टेबल बनाकर दे रहे है । नमाज़ का समय 

Namaz ka tarika (नमाज़ का तरीका बहुत ही आसान है )

Namaz padhne ka tarika बहुत ही आसान है नमाज़ या तो 2 रक’आत की होती है या फिर 3 ,या 4 रक’आत की होती है ।एक रक’आत में एक क़याम ,एक रुकू और दो सजदे होते है । Namaz ka tarika कुछ इस तरह से है 

Step 1:-

नमाज़ के लिए जानमाज़ लेले या कोई साफ कपड़ा जिसपर आप नमाज़ अदा कर सके।और क़िबले की तरफ रुक होना चाहिए।

Step 2 :-

नमाज़ की नीयत करले (ज़बानी नियत कोई जरूरी नही बस दिल से नियत जरूरी है) -में नियत करता हूँ  2 रकात नमाज़ फजर(वक़्त बदलता रहेगा वक़्त के हिसाब से) की सुन्नत वास्ते अल्लाह के पेश इमाम के पीछे मुँह मेरा काबा सरीफ की तरफ -अल्लाह अकबर कहे कर हाथ बांध लीजये।

Step 3 :- 

सना पढ़िए , फिर taawuz पढ़े ,इसके बाद सूरह फ़ातिहा पढ़े ,इसके बाद कोई एक और सूरह पढ़े -सूरह क़ौसर।

Step 4 :-

इसके बाद तकबीर (अल्लाहु अकबर) कहे कर रुकू में जाएं।

Step 5 :- 

रुकू में जाने के बाद अल्लाह की तस्बीह बयान करे -“सुबहाना रब्बिउल अज़ीम” तीन या 7 मर्तबा पढ़ें।

Step 6 :-

इसके बाद samiallahu liman hamida कहते हुए खड़े हो जाये। खड़े होने के बाद -रूकू की दुआ पढ़े। तकबीर कहते हुए सजदे में जाएं।

फिर अल्लाह की तस्बीह बयान करे । तकबीर कहते हुए बैठे और फिर तकबीर कहते हुए सजदे में जाएं ओर तस्बीह बयान करे।

Step 7 :-

एक रकात के बाद दूसरी रकात भी इसी तरह पढ़े बस दूसरी रकात में सूरह फ़ातिहा के बाद कोई दूसरी सूरह पढ़े -सूरह फ़लक ,या सूरह नास कोई भी।

Step 8 :- 

जब आप सजदे के बाद तशुहुद में बैठ कर अत्ताहियात पढ़े इसके बाद कोई एक दुआ पढ़े।

इस तरह से आप 2 रकात नमाज़ अदा कर सकते है ।

Namaz ki Niyat ka tarika ( नमाज़ की नीयत का तरीका )

नमाज़ की नीयत के लिए आपको ज़ुबान से नियत करना है ऐसा कही भी नही कहा गया है क्योंकि ज़ुबान से नियत करने में गलती हो सकती है ।लेकिन आप दिल से नियत कर सकते है और ज़ुबान से भी।अगर आप फ़ज़र में नमाज़ के लिए खड़े हो तो आप दिल मे सुन्नत या फ़र्ज़ की नियत करके नमाज़ अदा कर सकते है। चलिये हम आपको नमाज़ की नियत बताते है।

2 रकात नमाज़ की नियत ( Namaz ka tarika )

फ़ज़र की नीयत (सुन्नत)

में नियत करता हूँ 2 रकात नमाज़ फ़ज़र की सुन्नत रसूलल्लाह की वास्ते अल्लहा वाबारिक तल्हा मुँह मेरा काबा सरीफ की तरफ ,( अगर इमाम साहब नमाज़ पढ़ा रहे है) पेश इमाम के पीछे।

फ़ज़र की नियत ( फ़र्ज़ )

में नियत करता हूँ 2 रकात नमाज़ फ़ज़र की फ़र्ज़ वास्ते अल्लहा वाबारिक तल्हा के मुँह मेरा काबा सरीफ की तरफ ,( अगर इमाम साहब नमाज़ पढ़ा रहे है) पेश इमाम के पीछे।

इसी तरह सुन्नत ओर फ़र्ज़ की नियत कर सकते है और वक़्त की जगह आप फ़ज़र ,ज़ोहर,असर,मगरिब,ईशा बोल सकते जिस वक्त की नमाज़ हो उस वक़्त की नियत करे। या आप ज़ुबान से नही भी करते है तो दिल से नियत करके खड़े हो जाएं।

नमाज़ में पढ़ी जाने वाली सूरह 

नमाज़ में आप क़ुरआन की सभी सूरह पढ़ सकते है लेकिन हम कुछ सूरह का जिक्र कर रहे है जो अक़्सर पढ़ी जाती है जिनका जिक्र हम नीचे कर रहे है।

  1. ۞ Surah Al-Fatiha [01]
  2. ۞ Surah Al Kausar [108]
  3. ۞ Surah Al Falaq [113]
  4. ۞ Surah An Naas [114]
  5. ۞ Surah Al Ikhlas [112]
  6. ۞ Surah Kaafiroon [109]
  7. ۞ Surah Al Qadr [97]

 

۞ Surah Al-Fatiha [01]

بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيم ①ِ

الْحَمْدُ لِلَّـهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ ②

الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ ③

مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ ④

إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ ⑤

اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ ⑥

صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّالِّينَ ⑦

۞ Surah Al Kausar [108]

بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

إِنَّا أَعْطَيْنَاكَ الْكَوْثَر ①

فَصَلِّ لِرَبِّكَ وَانْحَرْ ②

إِنَّ شَانِئَكَ هُوَ الْأَبْتَرُ ③

۞ Surah Al Falaq [113]

بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ ①

مِن شَرِّ مَا خَلَقَ ②

وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ③

ِوَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ ④

وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَِ ⑤

۞ Surah An Naas [114]

بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ

قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ ①

مَلِكِ النَّاسِ ②

إِلَـٰهِ النَّاسِ ③

مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ ④

الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ ⑤

مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ ⑥

नतीज़ा (Conclusion)

हमारे इस आर्टिकल में आपको नमाज़ का तरीका (namaz ka tarika) की जानकारी कैसी लगी ,मुजे उम्मीद है आपको पसंद आई होगी। में गुजारिश करता हूँ अगर  मुझसे कही ग़लती हुई हो तो मुजे जरूर इतेलह करे। हमारे about section में आपको हमारे Mail id मिल जाएगी।

FAQS 

नमाज़ किस उम्र से वाज़िब है ?

नमाज़ 7 साल की उम्र से वाज़िब हो जाती है और गैर मुस्लिम अगर कलमा पढ़ कर ईमान लाता है तो उसपर भी वाज़िब हो जाती है।

नमाज़ की नियत कैसे करे ?

नियत की मैन 2 रकात नमाज़ फ़र्ज़ फ़ज़र की वास्ते अल्लहा वाबरिक ताल्हा मुँह मेरा काबा सरीफ की तरफ।

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