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	<title>ISLAMIC &#8211; Hindibaaz</title>
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		<title>Fitra kya hai ( what is fitra ) &#124; इस बार फितरा की रकम 70 रूपए तय की गई।</title>
		<link>https://hindibaaz.com/fitra-kya-hai/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[sarfaraj khan]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 29 Mar 2024 20:23:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ISLAMIC]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Fitra kya hai &#124; Fitra ki rakam 70 &#124; zakat &#124; Sadka &#124; Nisab &#124; How to pay fitra &#124; how to pay Zakat. सदकय फितरा एक अरबी अल्फाज़ है। जो इंसान की माली हालत को बयान करता है। इस्लाम में माना जाता है सदका बहुत एहम ही जिसे उन लोगों को देना जरूरी है...</p>
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<p><strong>Fitra kya hai | Fitra ki rakam 70 | zakat | Sadka | Nisab | How to pay fitra | how to pay Zakat.</strong></p>



<p>सदकय फितरा एक अरबी अल्फाज़ है। जो इंसान की माली हालत को बयान करता है। इस्लाम में माना जाता है सदका बहुत एहम ही जिसे उन लोगों को देना जरूरी है जो गरीबी हालत में है । फितरा इंसान पर फर्ज है जिसे रमदान मुबारक महीने में देना .</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>फितरा कैसे निकाला जाता है ? (How is Fitra taken out?)</strong></h2>



<p>फितरा निकालने के 4 तरीके है जो इस्लाम में बताए गए है ये आपकी माली हालत के हिसाब से ही बताए गए है। वो चार तरीके नीचे पढ़े।</p>



<p><strong>गेहूं से –&nbsp; </strong>अगर आप (example 50000) की हैसियत रखते है तो आप गेंहू के हिसाब से अपना फितर निकाल सकते है । आपको एक व्यक्ति पर 3 से 4 किलो ग्राम गेहूं की रकम देने होगी&nbsp;</p>



<p>आप हमेसा ज्यादा ही मानकर चले जिससे अल्लाह फितरा निकालने में कोई भी कमी ना रहे जाए।&nbsp;</p>



<p><strong>नोट : इस बार इमाम साहब ने फितरा की रकम एक इंसान पर Rs 70 रूपए बताई है।</strong></p>



<p><strong>जौं पर – </strong>अगर आप (Example 100000) की हैसियत रखते है तो आप जौं के किलो ग्राम के हिसाब से अपना फितरा की रकम तय कर सकते है बल्कि उससे कुछ बढ़ाकर ही रखे। आप अपने नजदीकी मस्जिद में जाकर भी फितरे की रकम पता करले।</p>



<p><strong>खजूर से –</strong> अगर आप middle class से उपर है तो आप फितरा की रकम खजूर से निकल सकते है । आपको नॉर्मल खजूर मार्केट में 100 रूपए तक मिल जाता है और आपको 3 से 4 किलो खजूर की रकम देने होगी।</p>



<p><strong>किसमिस से – </strong>अगर आप करोड़ पति है तो फिर आप अपना फितरा किसमिस से किलोग्राम के हिसाब से निकल सकते 3 से 4 किलो किसमिस एक व्यक्ति पर ।&nbsp;&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>फितरा की रकम निकालने का सबसे बेहतर तरीका</strong></h3>



<p>जब भी आप अपना या अपने परिवार में किसी भी व्यक्ति का फितरा निकले तो आप अपने एरिया में ऊपर दी गई चार चीजों में ( <strong>गेहूं, जौं, खजूर, किसमिस)</strong> जो सबसे महंगी हो उसके बराबर की रकम निकाल सकते हैं , लेकिन अपनी मलीय हैसियत के हिसाब से।&nbsp;</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>देश विदेश और शहर के हिसाब से फितरा&nbsp;</strong></h3>



<p>आप जिस भी सिटी या देश या विदेश में रहते है उस के नजदीक लोगो को फितरा दे और वही की Rate ke हिसाब से रकम अदा करे । लेकिन कई जगह ऐसी है जहां गरीब लोग मिस्किन लोग नही है जैसे saudi , dubai उस कंडीशन में आप दूसरे देश जैसे भारत में फितरा अदा कर सकते है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>फितरा कब अदा करना चाहिए&nbsp;</strong></h3>



<p>आप फितरा Eidulfitri से पहले यानी ईद की नमाज़ से पहले देना होता है । By chance आप भूल जाते है तो फिर EID की नमाज़ के बाद आप फितरा दे सकते है , लेकिन ज़रूर से ज़रूर फितरा निकले ।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>गरीबों तक अपना फितरा पहुंचाए&nbsp;</strong></h2>



<p>आप अपना फितरा उन लोगो तक भी पहुंचा सकते है जो गरीब और मिसकिन है जिनके बच्चे भूख और ईद के कपड़ो के लिए या अच्छे खाने के लिए या अच्छी तालीम के लिए या फिर किसी बीमारी से निजात के लिए एक बड़ी रकम ( Amount) की ज़रूरत है ।&nbsp;</p>



<p>अगर आपके आस पास ऐसे लोग नही है या आपके पास समय नहीं है या फिर आपके पास देने के लिए बहुत कुछ है लेकिन किसे देना सही है और किसे देना गलत है ये नही पता तो आप हमारे ज़रिए उन गरीब और मिस्किनो तक अपना पैसा पहुंचा सकते है।&nbsp;</p>



<p><strong>नोट :</strong> हमारे ज़रिए आप अपना फितरा गरीबों तक पहुंचा सकते है ,आप हम पर एतबार कर सकते है। हम आपका पैसा उन ज़रूरतमंदो तक सही जगह देंगे । जिसका सवाब आपको अल्लाह को तरफ से मिलेगा।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>How to pay Fitra ( फितरा का भुगतान )</strong></h2>



<p><strong>Step 1</strong>: आप हमारे QR Code की इमेज को Download करके और अपने किसी भी UPI Scanner से इमेज में जाकर हमारे Download की gayi image को Scan करके फितरा की रकम दे सकते है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="790" height="500" src="https://hindibaaz.com/wp-content/uploads/2024/03/20240330_004941_0000-min.png" alt="" class="wp-image-8377" style="width:876px;height:auto" srcset="https://hindibaaz.com/wp-content/uploads/2024/03/20240330_004941_0000-min.png 790w, https://hindibaaz.com/wp-content/uploads/2024/03/20240330_004941_0000-min-300x190.png 300w, https://hindibaaz.com/wp-content/uploads/2024/03/20240330_004941_0000-min-768x486.png 768w" sizes="(max-width: 790px) 100vw, 790px" /></figure>



<p><strong>Step 2 : </strong>UPI Payment करने के बाद आप payment का Screenshot ले सकते है और हमे <strong>Telegram Channel</strong> पर भेज सकते है ।</p>



<p><strong>Step 3 :</strong> telegram पर Screenshot भेजने के बाद आपको हमारा whatsapp Number mil jayega जहा आपको आपके फितरा की रकम किस जगह भेजी गई है उसकी जानकारी हासिल हो जायेगी। लेकिन अदा करने के 3 दिन बाद।</p>



<h3 class="wp-block-heading">What is Zakat? (ज़कात क्या है?)</h3>



<p>एक लाज़मी (Mandatory)  annual सदका, ज़कात का भुगतान योग्य बालिग (adult muslims) द्वारा किया जाता है जिनकी मालोदौलत एक इस्लामी (चंद्र) वर्ष के लिए <strong>निसाब</strong> मूल्य से ज्यादा है। तो उस शख्स को यह दान ज़रूरतमंद में बटाना ज़रूरी है जिससे अल्लाह (SWT) को खुश करता है। zakat का भुगतान घरेलू और दुनिया भर में सबसे ज्यादा जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए किया जाता है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">ज़कात के लिए कौन मुस्तहिक है? Who is entitled to Zakat?</h3>



<p>Holy कुरान पाक में यह निर्धारित (Determined)किया कि जकात प्राप्त करने का मुस्तहिक कौन है, यह बताते हुए: “अस-सदाकत (ज़कात) केवल फुकरा (गरीबों), और अल-मसाकिन (ज़रूरतमंदों) और (zakat fund) इकट्ठा करने के लिए नियोजित लोगों के लिए है;  और उन लोगों के दिलों को आकर्षित करने के लिए जिनका झुकाव (इस्लाम की ओर) हो गया है;  और कैदियो को आज़ाद कराना ;  और कर्ज़दार लोगों के लिए;  और अल्लाह के मार्ग के लिए (अर्थात मुजाहिदुन के लिए &#8211; जो पाक जंग में लड़ रहे हैं), और पथिक के लिए (एक यात्री जो हर चीज से अलग हो गया है);  अल्लाह की तरफ से फर्ज़ किया गया हो । और अल्लाह सब कुछ जानने वाला, सब कुछ देखने वाला है।&#8221;  &#8211; Chapter at-Tawbah Tevbe, 60</p>
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		<title>Islamic Calendar Short STORY in Hindi</title>
		<link>https://hindibaaz.com/islamic-calendar-short-story/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[sarfaraj khan]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 24 Dec 2023 10:02:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ISLAMIC]]></category>
		<category><![CDATA[Short Stories]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Islamic Calendar Short Story &#124; makka se madina movement &#124; Islamic History &#124; Islamic Day &#124; Islamic jung. Islamic Calendar short story दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा दिन इतना महत्वपूर्ण (अहम) दिन था कि इस दिन से पहले मक्का में बहुत कम लोग ही मुसलमान थे।&#160; लेकिन इस दिन के बाद कुछ ही सालों...</p>
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<p><strong>Islamic Calendar Short Story | makka se madina movement | Islamic History | Islamic Day | Islamic jung.</strong></p>



<p class="has-black-color has-text-color has-link-color wp-elements-eff2656609260b93a2614f9e0ec0edcc"><strong>Islamic Calendar <a href="https://hindibaaz.com/category/short-stories/" data-type="link" data-id="https://hindibaaz.com/category/short-stories/">short story</a></strong> दुनिया के इतिहास का सबसे बड़ा दिन इतना महत्वपूर्ण (अहम) दिन था कि इस दिन से पहले मक्का में बहुत कम लोग ही मुसलमान थे।&nbsp; लेकिन इस दिन के बाद कुछ ही सालों में तीन महाद्वीपों पर मुसलमानों का हुकूमत हो गई। और मुसलमान दुनिया की सबसे बड़ी सुपर ताक़त बन गये।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>Islamic Calendar Short Story</strong>.</h2>



<p>ताकतवर बनने के बाद मुसलमानों के इतने बड़े साम्राज्य को इकट्ठा करने के लिए हजरत उमर रज़ि अल्लाहो त-आला अन हू दुनिया के सबसे ताकतवर बादशा थे।&nbsp; उन्होंने एक इस्लामिक कैलेंडर बनाया.&nbsp; लेकिन समस्या यह थी कि इस कैलेंडर का पहला दिन कौन सा हो?&nbsp; इसलिए उन्होंने वह दिन चुना, जो सबसे बड़ा था। Hijrat (हिजरत)</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>Islamic Month</strong> </h2>



<figure class="wp-block-table"><table><tbody><tr><td>Month</td><td>Meaning</td><td>Urdu</td></tr><tr><td>Muharram</td><td>The Month of Allah</td><td>اللہ کا مہینہ</td></tr><tr><td>Safar</td><td>The Month of Distinction</td><td>امتیاز کا مہینہ</td></tr><tr><td>Rabi Al-Awwal</td><td>The Birth of the Beloved</td><td>محبوب کی پیدائش</td></tr><tr><td>Rabi Al-Thani</td><td></td><td></td></tr><tr><td>Jamada Al-Awwal</td><td></td><td></td></tr><tr><td>Jamada Al-Thani</td><td></td><td></td></tr><tr><td>Rajab</td><td>A Sacred Month</td><td>ایک مقدس مہینہ</td></tr><tr><td>Sha’ban</td><td>The Neglected Month</td><td>نظر انداز مہینہ</td></tr><tr><td>Ramadan</td><td>The Month of Fasting</td><td>روزوں کا مہینہ</td></tr><tr><td>Shawwal</td><td>The Month of Reward</td><td>انعام کا مہینہ</td></tr><tr><td>Dhul Qadah</td><td>A Sacred Month</td><td>ایک مقدس مہینہ</td></tr><tr><td>Dhul Hijjah</td><td>The 10 Best Days (The Month of Hajj)</td><td>10 بہترین دن (حج کا مہینہ)</td></tr></tbody></table><figcaption class="wp-element-caption">source : <a href="https://www.islamic-relief.org.uk/resources/islamic-calendar/2023-calendar/" data-type="link" data-id="https://www.islamic-relief.org.uk/resources/islamic-calendar/2023-calendar/" rel="nofollow noopener" target="_blank">click here</a></figcaption></figure>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस्लाम पर हिजरत का प्रभाव</strong>&nbsp;</h2>



<p>हिजरत यानी वह पहला दिन , क्योंकि इस दिन के बाद इस्लाम ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का इतिहास हमेशा के लिए बदल गया। 12 साल की उम्र तक, पैगंबर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम ने मक्का में इस्लाम की दावत दी लेकिन 12 साल बाद भी कुछ ही लोग इस्लाम में आए।&nbsp;&nbsp;</p>



<p>लेकिन उन कुछ लोगो को भी मक्का के काफ़िरों को बर्दाश्त नहीं हो रहा था। तो जब उन्होंने देखा कि पैग़म्बरे मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम इस्लाम के चाचा अबू तालिब का वफात फरमा गए ।और अब मक्का में पैगंबर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम की हिफाज़त करने वाला कोई नहीं है।&nbsp;</p>



<p>तो इसलिए उन्होंने अंत में सोचा की इस बार इस्लाम को ख़त्म करने की योजना बनाई सभी के लिए। मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम को शहीद करने की योजना।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>औस और खजरज़ कबीले&nbsp;</strong></h2>



<p>लेकिन इससे पहले मक्का से 400 किमी दूर मदीना की दो बड़े काबिले औस और खजरज़ के कई लोग मुसलमान बन चुके थे. और वे पैगम्बर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम को अपना लीडर बनाना चाहते थे।&nbsp; तो उनमें से 72 लोग आये और मक्का गए और पैगंबर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम को यह प्रस्ताव दिया, जिसे पैगंबर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम ने स्वीकार कर लिया।&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>मक्का से मदीना पलायन&nbsp;</strong></h2>



<p>जिसके बाद धीरे-धीरे मुसलमान काफिरों से बचते हुए मदीना चले गए। कुल मिलाकर 70 या 80 मुसलमानों ने पलायन किया। और पैगंबर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम के जीवन में सबसे अधिक खतरे के बावजूद, पैगंबर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम मक्का से आखिर में निकले ।</p>



<p>मक्का के लोगों ने पैगंबर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम को मक्का छोड़ने से पहले शहीद करने की यह योजना बनाई थी। मक्का एक बहुत ही कबीलाई समाज था।&nbsp; जिसमें एक ही परिवार कुरैश के बहुत सारे कबीले थे।और प्रत्येक कबीले ने हमेशा अपने सदस्यों का साथ किया, चाहे वे सही हों या ग़लत। मक्का वाले इससे डरते थे।</p>



<p>यदि हममें से किसी ने पैगम्बर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम को शहीद करने की कोशिश की, तो पैगम्बर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम की कबीले वाले बनू हाशिम, जो मक्का की सबसे बड़ी और मजबूत कबीले में से एक थी, उस जनजाति को जीवित नहीं छोड़ेगी।&nbsp; तो आख़िरकार,&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>इस्लाम को ख़त्म करने की साजिश</strong></h2>



<p>अबू जहल ने एक योजना बनाई। अगर एक क़बीला पैगम्बर को मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम, फिर हम ऐसा करते हैं कि सभी कबीलों मिलकर उन पर वार करें।&nbsp; जिसके बाद बनू हाशिम कभी भी सभी कबीलों से लड़ने की हिम्मत नहीं करेगी।&nbsp; और इस तरह इस्लाम दुनिया को ख़त्म कर देगा. इसलिए प्रत्येक जनजाति ने इस कार्य के लिए एक-एक युवक को चुना। और छुपते-छुपाते ये 11 लोग पहुंच गए</p>



<p>आधी रात में पैगंबर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम, का घर। लेकिन जैसे ही सुबह हुई तो उन्होंने देखा कि पैगम्बर साहब की जगह पर हजरत अली सो रहे थे। और पैगंबर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम वहां नहीं थे.&nbsp; दरअसल, पैगंबर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम ने अबू बक्र के साथ पहले ही योजना बना ली थी।&nbsp;&nbsp;</p>



<p>और उसी रात, पैगंबर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम पहले ही अबू बक्र के साथ मक्का छोड़ चुके थे।&nbsp; अब, मदीना मक्का के उत्तर में था, पैगंबर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम को इस रास्ते पर जाना चाहिए था।&nbsp; पैगंबर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम मदीना नहीं गए, बल्कि मदीना के दक्षिण में, मदीना के विपरीत, यमन की ओर गए।&nbsp; और मक्का से 5 किमी.उत्तर में एक गुफा बनाई गई थी।&nbsp; क्योंकि वे जानते थे कि उनके जाने के बाद मक्का वाले जरूर उनका पीछा करेंगे।&nbsp; और ऐसा ही हुआ.&nbsp;&nbsp;</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>100 पाउंड का लालच&nbsp;</strong></h2>



<p>अगले दिन, अबू सुफियान और अबू जहल ने मक्का में ऐलान की कि जो कोई मुहम्मद और अबू बक्र को जिंदा लाएगा, उसे इनाम दिया जाएगा सौ पाउंड.और अगर इन सौ पाउंड को आज के हिसाब से देखें तो ये एक या दो करोड़ रुपये हो जाते हैं.&nbsp; जिसके कारण मक्का से बहुत से लोग मदीना के रास्ते में पैगम्बर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम की तलाश करने लगे।&nbsp; परन्तु जब उन्होंने उसे मदीना के मार्ग में न पाया,</p>



<p>वे भी उसे दूसरी ओर देखने पहुंचे । और एक समूह मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम की गुफा तक जा पहुँचा लेकिन बहुत करीब से भी वे उन्हें नहीं देख सके। और वे वहां से वापस चले गये. अबू जहल और अबू सूफियान ने बाक़ी लोगों के साथ मिलकर हज़रत अली रज़ि अल्लाहो त-आला अन हू. को बहुत मारा ।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>हज़रत आसमा</strong>&nbsp;</h2>



<p>लेकिन उन्होंने पैगम्बर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम के स्थान के बारे में कुछ नहीं बताया।&nbsp; फिर वे सीधे अबू बकर रज़ि अल्लाहो त-आला अन हू : के घर पहुंचे। और उन्होंने उन की बेटी आसमा से पूछा, परन्तु उन्होंने कुछ नहीं बताया।&nbsp; इसलिए अबू जहल ने उन्हें ज़ोर का थप्पड़ मारा।&nbsp;&nbsp;</p>



<p>हालाँकि हज़रत अस्मा ये सब सहेने के बावजूद, फिर भी वह तीन दिनों तक मक्का के लोगों से छिपते हुए खाना पहुंचाती रही जब तक कि वह पैगंबर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम और अबू बक्र रज़ि अल्लाहो त-आला अन हू. के घर नहीं पहुँच गए।&nbsp;&nbsp;</p>



<p>तीन दिन बाद,पैगम्बर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) गार ए आफताब की गुफा से बाहर आये।&nbsp; अबू बक्र ने पहले ही एक आदमी के साथ सौदा कर लिया था और उसने उसे अपनी दो सबसे अच्छी चीज़ें दी थीं।इस शख्स को चुनना बेहद मुश्किल काम था क्योंकि उसे भी 2 करोड़ के इनाम का लालच आ गया होगा।</p>



<p>और पैगम्बर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम को धोखा देते ,इसी वजह से इस एहम काम के लिए उन्होंने अब्दुल्ला बिन अरकात को चुना, जो उस समय मुस्लिम भी नहीं थे, लेकिन उनके पास एक Special Skills था, वह अरबों के कई खुफिया रास्तों और तरीकों को जानते थे। बाकी अरब के लोग कभी भी उस रास्तों को नहीं गए और पैगम्बर मोहम्मद सल लल्लाहो अलेह वसल्लम को भी ऐसी ही रास्ते की ज़रूरत थी।</p>



<p>चूंकि उस समय पूरा अरब पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की तलाश में था, इसलिए पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने इतने एहम मिशन के लिए अब्दुल्ला बिन ऊरकत को चुना, न कि मुसलमान होने के आधार पर नहीं बल्कि योग्यता के आधार पर जैसे अब्दुल्लाह बिन ऊरकत पैगम्बर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के लिए ऊंट लेकर वहां पहुंचे</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>ऊूट की पूरी कीमत</strong></h2>



<p>उन्होंने हज़रत अबू बक्र (R.Al.Anhu.) से कहा कि मैं इस ऊँट पर केवल एक शर्त पर बैठूँगा कि मैं तुम्हें इस ऊँट की पूरी कीमत दूँगा। और उस वक्त जब&nbsp; मक्का की हर जनजाति अल्लाह के रसूल सल लल्लाहो अलैहि व सल्लम को शहीद&nbsp; करना चाहता था, इसलिए अल्लाह के सल लल्लाहो अलैहि व सल्लम  ने अली को मक्का में छोड़ दिया ताकि वह संपत्ति वापस कर सकें जो मक्का के लोगों ने पैगंबर (सल लल्लाहो अलैहि व सल्लम) के पास रखी थी। वे शक्श उन्हें और अबू बक्र को मदीना, यमन के विपरीत दिशा में ले गए।</p>



<p>मक्का से बहुत दूर जाकर फिर वापस मदीना की ओर मुड़ गए और मदीना पहुंचने से पहले ही पैगम्बर रसुलल्लाह सल लल्लाहो अलेह वसल्लम को समुद्र के बहुत करीब एक खुफिया रास्ते से मदीना भेज दिया गया। उस दिन</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इस्तकबाल&nbsp;</strong></h2>



<p>मदीना के लोगों ने पैगंबर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का इस्तकबाल किया जिसे दुनिया आज भी याद करती है कि पैगंबर(सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मक्का को बहुत खुफिया रूप से छोड़ दिया था लेकिन जैसे ही वह मदीना के पास पहुंचे, मदीना के लोगों ने उनका इस्तकबाल एक बादशा और नेता की तरह किया। मदीना में रहेने वाला हर कोई पैगंबर( सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को अपने घर में रहने दावत देता रहा लेकिन हमारे रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम किसी को भी मायूस करना नही चाहते थे ।</p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>ऊठ ने किया फैसला&nbsp;</strong></h2>



<p>तो आपने ये फैसला अपने&nbsp; फैसला किया की आप जिस ऊठ पर बैठ कर आए थे अपने सबसे बोला ये ऊूट जहां रुकेगा या जिसके घर के सामने रुकेगा में वही पर क्याम करूंगा । आज उसी जगह के करीब पर मस्जिद तामीर है।</p>



<p>कुछी सालो बाद दुनिया की सबसे स्ट्रॉंग सिटी बन गई और यही से दुनिया की तीन कौन्टिनेट्स के फैसले होने लगे और आज तक मदिना के आवाम की ये कुर्बानी मुसल्मान कभी भी नहीं भूले है ।</p>



<p>Read Also</p>



<p><a href="https://hindibaaz.com/short-story-of-dajjal/" target="_blank" data-type="link" data-id="https://hindibaaz.com/short-story-of-dajjal/" rel="noreferrer noopener">short story of Dajjal</a></p>



<h2 class="wp-block-heading"><strong>FAQs Islamic Calendar</strong></h2>


<div id="rank-math-faq" class="rank-math-block">
<div class="rank-math-list ">
<div id="faq-question-1703336747250" class="rank-math-list-item">
<h3 class="rank-math-question "><strong>Islamic Calendar ka पहला दिन कोनसा होता है।</strong></h3>
<div class="rank-math-answer ">

<p>इस्लामी कैलेंडर का पहला दिन हिजरी है ,ये वो दिन है जब रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मक्का से मदीना के लिए हिजरत कर गए थे।</p>

</div>
</div>
<div id="faq-question-1703336758821" class="rank-math-list-item">
<h3 class="rank-math-question "><strong>जिस गुफा में पैगंबर रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने पनाह ली उसका नाम क्या है</strong></h3>
<div class="rank-math-answer ">

<p>उस गुफा को रसूल ए गार कहा जाता है.</p>

</div>
</div>
</div>
</div>


<p></p>



<p></p>



<p></p>
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		<title>Namaz ka tarika ( नमाज़ का तरीका ), NAMAZ कैसे पढ़े ? Namaz Benifits 2023</title>
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		<dc:creator><![CDATA[sarfaraj khan]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Apr 2022 19:10:20 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ISLAMIC]]></category>
		<category><![CDATA[GHUSL]]></category>
		<category><![CDATA[NAMAZ]]></category>
		<category><![CDATA[Namaz ka Tarika]]></category>
		<category><![CDATA[WAZU]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Namaz ka tarika ,Namaz कैसे पढ़े ,नमाज़ में कौनसी आयतें पढ़े ,नमाज़ में कितनी रकात होती है। नमाज़ में क्या वाज़िब है और क्या फ़र्ज़ है जाने हमारे इस तहरीर (लेख) में। सबसे पहले हमारी तरफ से आपको अस्सलामु अलैकुम &#8211; मेरा नाम सरफराज है ओर में आपके लिए इस लेख में नमाज़ का तरीका...</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><b>Namaz ka tarika </b><span style="font-weight: 400;">,</span><b>Namaz कैसे पढ़े</b><span style="font-weight: 400;"> ,</span><b>नमाज़ में कौनसी आयतें पढ़े </b><span style="font-weight: 400;">,</span><b>नमाज़ में कितनी रकात होती है।</b><span style="font-weight: 400;"> नमाज़ में क्या वाज़िब है और क्या फ़र्ज़ है जाने हमारे इस तहरीर (लेख) में।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सबसे पहले हमारी तरफ से आपको अस्सलामु अलैकुम &#8211; मेरा नाम सरफराज है ओर में आपके लिए इस लेख में नमाज़ का तरीका बताने वाला हूँ जिससे आपको सही तरीका पता चले और आप दुरुस्त नमाज़ अदा कर सको।</span></p>
<h3><b>Namaz ka tarika ( नमाज़ का तरीका ) </b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">नमाज़ अल्लाह से बात चीत करने का एक ज़रिया है।इस्लाम 5 स्तंभ पे टिका है जिसमे से एक नमाज़ है। अल्लाह ने नमाज़ हर उस शख्स पर फ़र्ज़ की है जो अल्लाह पर उसके रसूल </span><span style="font-weight: 400;">(SAW) </span><span style="font-weight: 400;">पर यकीन रखता हो यानी मोमिन औरत ओर मर्द ओर नमाज़ वाज़िब है।</span></p>
<h3><b>Namaz ki Ahmiyat ( नमाज़ की अहमियत )</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">नमाज़ की क्या अहमियत है ये हम जानेंगे अगर आप इस बात को अच्छे से जान लेते है तो शायद कभी नमाज़ छोड़ना पसंद नही करेंगे। नमाज़ हर हाल में वाज़िब है।यहाँ तक अल्लाह ने नमाज़ को जंग में भी वाज़िब किया अगर आप जंग में है तो </span><b>सलातुल कौफ़ नमाज़</b><span style="font-weight: 400;"> पड़ सकते है।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">आज हम जिस धड़ल्ले से नमाज़ों को छोड़ रहे है ज़रा ज़रा से बात पर हम नमाज़ों को बिल्कुल तवज्जों नही देते है। अगर हम सफर में है तो हमारी नमाज़े छूट जाती है या हम शादी में है तो हमारी नमाज़े छूट जाती है या हम खेल के मैदान में है तो हमारी नमाज़े छूट जाती है। </span></p>
<p><b>हुजूर (</b>SAW) <b>ने इरशाद फ़रमाया की नमाज़ (Namaz) मेरी आँखों की ठंडक है।</b></p>
<h3><b>Namaz kya hai ( नमाज़ क्या है )</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">नमाज़ शब्द एक parsian word </span><b>(Persian: نماز) </b><span style="font-weight: 400;">है। और arabic शब्द salah है जिसे (</span><b>Arabic: صَلاة ) </b><span style="font-weight: 400;">कहते है। हर वह शख्स जिसने कलमा पढ़ा है उसपर नमाज़ वाज़िब है नमाज़ 7 साल की उम्र से वाज़िब हो जाती है। ओर Quaran में साफ तौर पर लिखा गया है जो शख्स नमाज़ नही पड़ता वह अल्लाह की नजर में सबसे नीचे है।जो लोग नमाज़ पड़ते है और छोड़ते है उनपे भी लालत भेजी गई है।हर मोमिन ओर मर्द को 5 वक़्त की नमाज़ पढ़नी चाहिए जोकि फ़र्ज़ है। कुछ लोग तो इसलिए नमाज़ छोड़ देते है कि जनको नमाज़ का तरीका ही नही पता तो उनके लिए हम </span><b>namaz ka tarika</b><span style="font-weight: 400;"> बता रहे</span><b> । </b><span style="font-weight: 400;">नमाज़ के लिए किसी भी शख्स से जानना आलिम से जानना कोई शर्म की बात नही बल्कि नमाज़ छोड़ना शर्म की बात है।</span></p>
<h4><b>नमाज़ के लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होती है पहेले।</b></h4>
<ul>
<li aria-level="1"><b>ग़ुस्ल का होना</b></li>
</ul>
<ul>
<li aria-level="1"><b>वजू का होना</b></li>
</ul>
<ul>
<li aria-level="1"><b>कपड़ो का पाक होना</b></li>
</ul>
<ul>
<li aria-level="1"><b>जगह का पाक होना</b></li>
</ul>
<p><b style="color: #111111; font-family: Roboto, sans-serif; font-size: 22px;">Gusl ka tarika ( ग़ुस्ल का तरीका )</b><br /><b></b></p>
<p><span style="font-weight: 400;">अगर आप नापाक है तो आपका ग़ुस्ल होना बेहद जरूरी है।पेशाब का छूट जाना नापाक करता है या कपड़ो में नजासत का लगना भी नापाकी है। हमबिस्तरी के बाद भी ग़ुस्ल जरूरी है। </span><b>ग़ुस्ल का तरीका</b><span style="font-weight: 400;"> जाने</span></p>
<ol>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">दोनों हाथ कलाहियो तक धो लीजिये ।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">शर्मगाह पर पानी डाल कर धो लीजिये ।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">ठीक उसी तरह सारी चीज़ें कीजिये जैसे वजू में करते हैं</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">कुल्ली कीजिये ।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">नाक में पानी डालिए ।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">कान को भी धोए।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">और पुरे बदन पर आगे और पीछे जानिब पानी डालिए</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">सर धो लीजिये ।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">हाथ पांव धो लीजिये।</span></li>
</ol>
<h3><b>Ghusl ki Dua ( ग़ुस्ल की दुआ )</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">ये ग़ुस्ल का तरीका है याद रहे आप ग़ुस्ल में ज्यादा से ज्यादा पानी मत बहाये बस अपने बदन के हर हिस्से को वज़ू की तरह 3 बार धोए । इस्लाम मे जायद पानी बहाना गैर मुनासिब तरीका है।</span></p>
<h3><b>ग़ुस्ल की तीन फ़र्ज़ है ।</b></h3>
<ol>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">कुल्ली इस तरह करना कि होठ से लेकर हलक तक ओर दांतो की सारी जड़ो में पानी पहुच जाए।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">नाक में पानी इस तरह डालना की नरम हड्डी तक पानी पहुच सके।</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">सिर से पैर तक इस तरह पानी बहाना की एक बाल बराबर भी कही सूखा ना रहे ,इन तीनो से कुछ भी छूट तो हरगिज ग़ुस्ल नही होगा।</span></li>
</ol>
<h4><b>क्या ग़ुस्ल के बाद वज़ू की जरूरत है ?</b></h4>
<p><span style="font-weight: 400;">अगर आप ग़ुस्ल करते वक़्त वज़ू कर चुके है या ग़ुस्ल करने के बाद आप कोई ऐसा काम नही किया जिससे वज़ू का टूटना मुनासिब हो तो आपको ग़ुस्ल के बाद वज़ू की जरूरत नही लेकिन बेहतर होगा ग़ुस्ल के साथ वज़ू किया जाए।</span></p>
<h4><b>ग़ुस्ल खाने में पैशाब करना कैसे है</b></h4>
<p><span style="font-weight: 400;">अगर आप ग़ुस्ल खाने में पैशाब करते है जोकि अक्सर लोग ऐसा करते है तो शर्त ये है कि आपका ग़ुस्लखाना कच्चा मीठी का नही होना चाहिए जहाँ पैशाब जमा हो जाये या सुख जाए ऐसा करना मकरू है (हराम के करीब)। ऐसा करने से आपको भूलने की बीमारी हो सकती है .</span></p>
<h3><b>Wazu ka Tarika (वज़ू का तरीका)</b></h3>
<p><b>नमाज़ अदा करने के लिए वज़ू शर्त है</b><span style="font-weight: 400;"> -वज़ू के बिना आप नमाज़ अदा नही कर सकते बिना वज़ू नमाज़ पढ़ना जाएज़ नही। </span><b>वज़ू का तरीका</b><span style="font-weight: 400;"> ये है कि आप नमाज़ के लोए वज़ू का इरादा कर ओर वज़ू शुरू करने से पहेले बिस्मिल्लाह कहे ।</span></p>
<ul>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">दोनों कलाहियों तक हाथ धोंये</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">कुल्ली करे </span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">नाक में पानी चढ़ाये </span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">चेहरा धोंये</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">दाढ़ी में खिलाल करें</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">दोनों हाथ कुहनियों तक धोंये</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">एक बार सर का और कानों का मसाह करें</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">(मसह का तरीका -आप अपने हाथों को गिला कर के एक बार सर और दोनों कानों पर फेर लें। कानों को अंदर बाहर से अच्छी तरह साफ़ करे।)</span></li>
<li style="font-weight: 400;" aria-level="1"><span style="font-weight: 400;">दोनों पांव टखनों तक धोंये</span></li>
</ul>
<p><span style="font-weight: 400;">ये वज़ू का तरीका है तीन तीन बार आपको पानी लेकर हाथ,नाक,कान,मुह ओर पाँव धोने होते है लेकिन मसहा एक बार धोना होता है। जायद पानी बहाना अल्लाह के रसूल(</span><span style="font-weight: 400;">ﷺ) </span><span style="font-weight: 400;">ने मना फरमाया है ।</span></p>
<h3><b>वज़ू की दुआ ( wazu ki dua )</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">वज़ू करने के बाद आपको ये दुआ पढ़नी है ।</span></p>
<p><img decoding="async" class=" wp-image-4799 aligncenter" src="https://hindibaaz.com/wp-content/uploads/2022/04/wazu-ki-dua-300x168.png" alt="wazu ki dua" width="451" height="253" /></p>
<p><span style="font-weight: 400;">ALLAHUmmaj’alni minat tawwabeen waj’alnee mina-al mutahhareena</span></p>
<h3><b>नमाज़ की रक&#8217;आत और समय (</b><b>Namaz ka tarika )</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">सभी मुसमानों के लिए 5 वक़्त की नमाज़ फ़र्ज़ की गई है जो कुछ इस तरह से है हम आपको इसका एक टेबल बनाकर दे रहे है । नमाज़ का समय </span></p>
<h3><b>Namaz ka tarika (नमाज़ का तरीका बहुत ही आसान है )</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">Namaz padhne ka tarika बहुत ही आसान है नमाज़ या तो 2 </span><b>रक&#8217;आत </b><span style="font-weight: 400;">की होती है या फिर 3 ,या 4 </span><b>रक&#8217;आत की </b><span style="font-weight: 400;">होती है ।एक रक&#8217;आत में एक क़याम ,एक रुकू और दो सजदे होते है । </span><b>Namaz ka tarika</b><span style="font-weight: 400;"> कुछ इस तरह से है </span></p>
<p><b>Step 1:-</b></p>
<p><span style="font-weight: 400;">नमाज़ के लिए जानमाज़ लेले या कोई साफ कपड़ा जिसपर आप नमाज़ अदा कर सके।और क़िबले की तरफ रुक होना चाहिए।</span></p>
<p><b>Step 2 :-</b></p>
<p><span style="font-weight: 400;">नमाज़ की नीयत करले (ज़बानी नियत कोई जरूरी नही बस दिल से नियत जरूरी है) -में नियत करता हूँ  2 रकात नमाज़ फजर(</span><b>वक़्त बदलता रहेगा वक़्त के हिसाब से)</b><span style="font-weight: 400;"> की सुन्नत वास्ते अल्लाह के पेश इमाम के पीछे मुँह मेरा काबा सरीफ की तरफ -अल्लाह अकबर कहे कर हाथ बांध लीजये।</span></p>
<p><b>Step 3 :- </b></p>
<p><span style="font-weight: 400;">सना पढ़िए , फिर taawuz पढ़े ,इसके बाद सूरह फ़ातिहा पढ़े ,इसके बाद कोई एक और सूरह पढ़े -सूरह क़ौसर।</span></p>
<p><b>Step 4 :-</b></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इसके बाद तकबीर (अल्लाहु अकबर) कहे कर रुकू में जाएं।</span></p>
<p><b>Step 5 :- </b></p>
<p><span style="font-weight: 400;">रुकू में जाने के बाद अल्लाह की तस्बीह बयान करे -&#8220;सुबहाना रब्बिउल अज़ीम” तीन या 7 मर्तबा पढ़ें।</span></p>
<p><b>Step 6 :-</b></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इसके बाद samiallahu liman hamida कहते हुए खड़े हो जाये। खड़े होने के बाद -रूकू की दुआ पढ़े। तकबीर कहते हुए सजदे में जाएं।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">फिर अल्लाह की तस्बीह बयान करे । तकबीर कहते हुए बैठे और फिर तकबीर कहते हुए सजदे में जाएं ओर तस्बीह बयान करे।</span></p>
<p><b>Step 7 :-</b></p>
<p><span style="font-weight: 400;">एक रकात के बाद दूसरी रकात भी इसी तरह पढ़े बस दूसरी रकात में सूरह फ़ातिहा के बाद कोई दूसरी सूरह पढ़े -सूरह फ़लक ,या सूरह नास कोई भी।</span></p>
<p><strong>Step 8 :- </strong></p>
<p><span style="font-weight: 400;">जब आप सजदे के बाद तशुहुद में बैठ कर अत्ताहियात पढ़े इसके बाद कोई एक दुआ पढ़े।</span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">इस तरह से आप 2 रकात नमाज़ अदा कर सकते है ।</span></p>
<h3><b>Namaz ki Niyat ka tarika ( नमाज़ की नीयत का तरीका )</b></h3>
<p><span style="font-weight: 400;">नमाज़ की नीयत के लिए आपको ज़ुबान से नियत करना है ऐसा कही भी नही कहा गया है क्योंकि ज़ुबान से नियत करने में गलती हो सकती है ।लेकिन आप दिल से नियत कर सकते है और ज़ुबान से भी।अगर आप फ़ज़र में नमाज़ के लिए खड़े हो तो आप दिल मे सुन्नत या फ़र्ज़ की नियत करके नमाज़ अदा कर सकते है। चलिये हम आपको नमाज़ की नियत बताते है।</span></p>
<h3><b>2 रकात नमाज़ की नियत ( </b><b>Namaz ka tarika )</b></h3>
<h4><b>फ़ज़र की नीयत (सुन्नत)</b></h4>
<p><span style="font-weight: 400;">में नियत करता हूँ 2 रकात नमाज़ फ़ज़र की सुन्नत रसूलल्लाह की वास्ते अल्लहा वाबारिक तल्हा मुँह मेरा काबा सरीफ की तरफ ,( अगर इमाम साहब नमाज़ पढ़ा रहे है) पेश इमाम के पीछे।</span></p>
<h4><b>फ़ज़र की नियत ( फ़र्ज़ )</b></h4>
<p><span style="font-weight: 400;">में नियत करता हूँ 2 रकात नमाज़ फ़ज़र की फ़र्ज़ वास्ते अल्लहा वाबारिक तल्हा के मुँह मेरा काबा सरीफ की तरफ ,( अगर इमाम साहब नमाज़ पढ़ा रहे है) पेश इमाम के पीछे।</span></p>
<p>इसी तरह सुन्नत ओर फ़र्ज़ की नियत कर सकते है और वक़्त की जगह आप फ़ज़र ,ज़ोहर,असर,मगरिब,ईशा बोल सकते जिस वक्त की नमाज़ हो उस वक़्त की नियत करे। या आप ज़ुबान से नही भी करते है तो दिल से नियत करके खड़े हो जाएं।</p>
<p><strong style="color: #111111; font-family: Roboto, sans-serif; font-size: 22px;">नमाज़ में पढ़ी जाने वाली सूरह</strong><span style="font-weight: 400;"> </span></p>
<p><span style="font-weight: 400;">नमाज़ में आप क़ुरआन की सभी सूरह पढ़ सकते है लेकिन हम कुछ सूरह का जिक्र कर रहे है जो अक़्सर पढ़ी जाती है जिनका जिक्र हम नीचे कर रहे है।</span></p>
<ol>
<li><b>۞ Surah Al-Fatiha [01]</b></li>
<li><b>۞ Surah Al Kausar [108]</b></li>
<li><b>۞ Surah Al Falaq [113]</b></li>
<li><b>۞ Surah An Naas [114]</b></li>
<li><b>۞ Surah Al Ikhlas [112]</b></li>
<li><b>۞ Surah Kaafiroon [109]</b></li>
<li><b>۞ Surah Al Qadr [97]</b></li>
</ol>
<p> </p>
<h4 style="text-align: center;"><b>۞ Surah Al-Fatiha [01]</b></h4>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيم ①ِ</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">الْحَمْدُ لِلَّـهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ ②</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ ③</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ ④</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ ⑤</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ ⑥</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّالِّينَ ⑦</span></p>
<h4 style="text-align: center;"><b>۞ Surah Al Kausar [108]</b></h4>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">إِنَّا أَعْطَيْنَاكَ الْكَوْثَر ①</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">فَصَلِّ لِرَبِّكَ وَانْحَرْ ②</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">إِنَّ شَانِئَكَ هُوَ الْأَبْتَرُ ③</span></p>
<p style="text-align: center;"><b style="color: #111111; font-family: Roboto, sans-serif; font-size: 19px;">۞ Surah Al Falaq [113]</b></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ ①</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">مِن شَرِّ مَا خَلَقَ ②</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ ③</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">ِوَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ ④</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَِ ⑤</span></p>
<h4 style="text-align: center;"><b>۞ Surah An Naas [114]</b></h4>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">بِسْمِ اللَّـهِ الرَّحْمَـٰنِ الرَّحِيمِ</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ ①</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">مَلِكِ النَّاسِ ②</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">إِلَـٰهِ النَّاسِ ③</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ ④</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ ⑤</span></p>
<p style="text-align: center;"><span style="font-weight: 400;">مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ ⑥</span></p>
<h2><span style="font-weight: 400;">नतीज़ा (Conclusion)</span></h2>
<p><span style="font-weight: 400;">हमारे इस आर्टिकल में आपको नमाज़ का तरीका </span><b>(namaz ka tarika)</b><span style="font-weight: 400;"> की जानकारी कैसी लगी ,मुजे उम्मीद है आपको पसंद आई होगी। में गुजारिश करता हूँ अगर  मुझसे कही ग़लती हुई हो तो मुजे जरूर इतेलह करे। हमारे about section में आपको हमारे Mail id मिल जाएगी।</span></p>
<h2><span style="color: #111111; font-family: Roboto, sans-serif; font-size: 22px;"><strong>FAQS</strong> </span></h2>

<div id="rank-math-faq" class="rank-math-block">
<div class="rank-math-list ">
<div id="faq-question-1662133798730" class="rank-math-list-item">
<h3 class="rank-math-question "><strong>नमाज़ किस उम्र से वाज़िब है ?</strong></h3>
<div class="rank-math-answer ">

<p>नमाज़ 7 साल की उम्र से वाज़िब हो जाती है और गैर मुस्लिम अगर कलमा पढ़ कर ईमान लाता है तो उसपर भी वाज़िब हो जाती है।</p>

</div>
</div>
<div id="faq-question-1662133815084" class="rank-math-list-item">
<h3 class="rank-math-question "><strong>नमाज़ की नियत कैसे करे ?</strong></h3>
<div class="rank-math-answer ">

<p>नियत की मैन 2 रकात नमाज़ फ़र्ज़ फ़ज़र की वास्ते अल्लहा वाबरिक ताल्हा मुँह मेरा काबा सरीफ की तरफ।</p>

</div>
</div>
</div>
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