20 years kufiya tea stall in Allahabad civil lines – जिसे लोग नहीं पहचानते
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अल्हाबाद की Civil Lines की सड़कों पर एक ऐसी चाय की दुकान बसी हुई है, जो बिना बड़े बोर्ड, बिना किसी विज्ञापन, और बिना किसी दिखावे के—20–25 साल से लोगों की सुबह, दोपहर और शाम को ज़िंदा रख रही है.
यह जगह है “अल्हाबाद कुफ़िया चाय अड्डा”, एक ऐसा कोना जहाँ की चाय कुछ खास नही लेकिन smoking बल्कि दिन की थकावट और ऑफिस को सारी टेंशन यही आकर एक गर्म जोशी भरी दवा है और BC में निकल जाती है.
दुकान के मालिक का नाम लोग जानते हों या नहीं—पर उनकी चाय, दोनों हर आने-जाने वाले की यादों में बसी रहती हैं. दुकान का मालिक ज़्यादा पहचान में नहीं आता, इसलिए लोगों के लिए वो बस “Gayb movie की तरह हैं.
kufiya tea stall in Allahabad civil lines के दिल में बसा एक अलग संसार
ये अड्डा Civil Lines के Subhash चौराहे के पास, Eden Café के बिलकुल बगल में है. बाहर से देखने पर यह कोई fancy जगह नहीं लगती, लेकिन जैसे ही आप भीतर कदम रखते हैं, एक अलग ही दुनिया महसूस होती है.
यहाँ 4–5 पुराने वफ़ादार कर्मचारी हैं, जो इतने सालों से इस जगह का पूरा सिस्टम संभाले हुए हैं. किसी के हाथ में हमेशा गरम चाय की ketli, किसी के पास ताज़े बन-मक्खन की प्लेट, किसी के पास बिल, तो कोई टेबल साफ करता हुआ—सब अपने-अपने काम में एकदम शांत और तालमेल के साथ लगे रहते हैं.

कुर्सियाँ यहाँ खूब हैं, और बैठने की जगह की कभी कमी नहीं पड़ती.
एक कोना smokers के लिए, एक कोना दोस्तों के ग्रुप के लिए, और एक हिस्सा ऐसा जहाँ लोग आराम से ऑफिस की छोटी-छोटी मीटिंग्स भी कर लेते हैं.
Smoking Allowed – इस जगह की असली पहचान
अल्हाबाद में smoking zones बहुत कम मिलते हैं.
लेकिन यहाँ नियम साफ है:
“चाय पीओ, सिगरेट पियो, शांति से बैठो, और अपना वक्त एन्जॉय करो.”
शाम होते-होते यहाँ कॉलेज के लड़के, freelancers, government employees, lawyers, late-shift वाले workers—सब अपनी-अपनी cigarette और चाय के साथ टाइम बिताते दिख जाते हैं.
यही वजह है कि बहुत से लोग इसे मज़ाक में “Smokers का स्वर्ग” भी बोल देते हैं.जिसका हम इसे kufiya tea stall in Allahabad civil lines नाम से जानते हे.
‘कुफ़िया’ नाम का मज़ेदार इतिहास
इस अड्डे का नाम “कुफ़िया” भी बड़ा दिलचस्प है.
क्योंकि जो भी नया व्यक्ति सिविल में आता हे तो उसे चाय की शॉप रोड पर ही मिल जाती लेकिन आराम से बैठ कर चाय के साथ सिगरेट का मजा नहीं मिल पाता. और ये जगह मार्केट के बीच में दुकानों के पीछे अच्छी खासी जगह के साथ आपको बैठने की व्यवस्था ओर सिगरेट चाय या समोसा मिल जाता है . सोने पे सुहागा ये कि बगल में पान की शॉप भी है.

ज्यादातर लड़के चाय पीकर वहीं अपने फील्ड वर्क चले जाते थे.
धीरे-धीरे चाय की दुकान को ही लोग बोलने लगे—“चलो उस कुफ़िया अड्डे पर चलते हैं.”
नाम बैठ गया, और जगह मशहूर हो गई.
साधारण खाने में भी दिल छू लेने वाला स्वाद
यहाँ की चाय तो अपनी जगह legend है ही, लेकिन खाने में भी ऐसा देसी स्वाद मिलता है जो कहीं और मिलना मुश्किल है.
यहाँ की खास चीज़ें:
- बन-मक्खन – हल्का मीठा, हल्का कुरकुरा, मक्खन से लिपटा हुआ
- नमकीन – चाय के साथ perfect छोटा साथी
- छोले समोसा – मसालेदार, देसी, और भरपूर
- दम आलू समोसा – इसका अपना ही fan base है
- कटिंग चाय – छोटी लेकिन असरदार
छोले-समोसा ज़्यादा तेल वाला नहीं होता, और न ही बहुत सूखा. स्वाद एकदम ऐसा जो सीधे दिल में उतर जाए.
दम आलू समोसा हल्का तीखा, हल्का चटपटा—ऐसा combination जो सुबह, दोपहर, शाम, किसी भी टाइम फिट बैठता है.
ऑफिस बैठकों का अनकहा ठिकाना
यह चाय अड्डा सिर्फ smokers या दोस्तों का अड्डा नहीं है.
यहाँ रोज़ कई छोटी-छोटी ऑफिस मीटिंग्स, planning sessions, interviews तक होते दिख जाते हैं.
कारण बिल्कुल simple:
- जगह शांत रहती है
- चाय लगातार मिलती रहती है
- chairs comfortable हैं
- privacy भी रहती है
- budget bhi ₹10-30 ke beech
कई बार ऐसा लगता है जैसे अल्हाबाद का आधा underground startup culture यहीं बैठकर प्लान बनाता हो.
20–25 साल की Legacy – बिना advertising, बिना show-off
इस अड्डे की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह low profile है.
- न बड़ा hoarding
- न Instagram promotion
- न fancy ambiance
फिर भी हर दिन यहाँ भीड़ रहती है, क्योंकि असली taste को advertising की ज़रूरत नहीं होती.
अल्हाबाद की पीढ़ियाँ बदलीं, cafés बदले, habits बदलीं… लेकिन यह adda अपनी simplicity के साथ आज भी खड़ा है.
क्यों कई अल्हाबाद वाले भी इसे नहीं जानते?
अजीब लगता है, पर सच है. kufiya tea stall in Allahabad civil lines में इतने मोड़, इतनी गालियाँ, इतने छोटे-छोटे रास्ते हैं कि बहुत से local लोग भी इस जगह पर नहीं पहुँचे.
इसका एक कारण और है—दुकान इतना शोर-शराबा नहीं करती. Owner साहब शांत स्वभाव के हैं. जो आता है, वो taste में खो जाता है, और जो नहीं आता—वो किसी fancy café में 150 रुपये की coffee पीकर खुश रहता है.
लेकिन पुराने अल्हाबादियों के लिए, यह अड्डा nostalgia की किताब का एक चमकीला पन्ना है.
अड्डे का माहौल – बिल्कुल बिना दिखावे वाला, पर जादुई
यहाँ ना fancy lights हैं, ना AC, ना बड़े menus.
- चाय की भाप
- समोसे की खुशबू
- ताज़ी हवा
- smoking corner
- दोस्ती भरी बातें
यही इस जगह का असली माहौल है.
लोग यहाँ अकेले आते हैं, लेकिन अकेला महसूस नहीं करते.
यह अड्डा एक जगह नहीं—एक एहसास है
जो लोग पहली बार आते हैं, उन्हें लगता है जैसे वो किसी पुराने देसी film set में बैठ गए हों.
पुरानी कुर्सियाँ, steel की plates, गरम चाय, ऊँची आवाज़ में चलती बातचीत—सब मिलकर वो atmosphere बनाते हैं जिसे पैसों से नहीं खरीदा जा सकता.
कुछ लोग यहाँ heartbreak heal करने आते हैं.
कुछ दोस्ती निभाने.
कुछ अकेले बैठकर सोचने.
और कुछ बस अपनी रोज़ की चाय लेने.
ये Tea stall sunday close raheta है. लोकेशन ऊपर दी गई हैं.
